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कुपोषण

क्वाशियोरकोर (Kwashiorkor) –

प्रोटीन कुपोषण एक ऐसी अवस्था है जो निम्न सामाजिक अर्थिक स्तर के बच्चों में देखी जाती है। इसमें बालक की वृद्धि रूक जाती है। और निर्भर करने वाले अंगो में जैसे कि पैर आदि में सूजन आ जाती है।

कारण (Aetiology) –

  • भोजन की कमी।
  • गरीबी
  • संक्रामक रोग।
  • श्वास रोग, खसरा आदि।
  • दूषित वातावरण, अस्वस्थ माँ, बालक को स्तनपान न कराना, रूढ़िवादी कुरीतियाँ, शिशु को देर से अन्न खिलाना शुरू करना।

नोट :- वह सभी कारण चाहे समाजिक हों या शारीरिक जिसमे बच्चें का पोषण सही तरीके से न होता हो। इस रोग को जन्म देता है।

लक्षण (Symptoms) –

  • भूख नही लगती।
  • पतले दस्त होना।
  • निढ़ाल, किसी चीज मे रूचि नहीं दिखना, खिलौनों से नही खेलना।
  • वृद्धि का रूकना।
  • सूजन अधिकतर पैरो में व कभी-कभी मुंह पर। बाल पतले, सूखे, सीधे व चमकहीन हो जाते है व उनका रंग बदल जाता है।
  • त्वचा पर बड़े-बड़े लालिमा लिए हुए धब्बे हो जाते है।
  • त्वचा सूखी व ऊपर की सतह आसानी से झड़ती रहती है। चेहरा चन्द्राकार व फूला-फूला रहता है। हाथ की मांसपेशियाँ क्षीण हो जाती है पर पैर सूजे हुए रहते हैं।
  • यकृत बढ़ जाता है। छूने पर मुलायम व उसके किनारे गोलाई लिए हुए होते है।
  • इस रोग से ग्रस्त लड़कियों मे जल्दी ही रजोदर्शन की अवस्था आ जाती है।

चिकित्सा (Treatment)

  • बच्चों में कुपोषण का कारण, उसके साथ दूसरे अभाव या बीमारी का पता लगाकर उसकी चिकित्सा करें।
  • भोजन की खुराक बढ़ाये।

कुपोषणता के प्रकार

    1. कम कुपोषणता – बच्चे का वजन जितना आवश्यक है, उसका 60 से 80 प्रतिशत होता है।
    2. तीव्र कुपोषणता – बच्चे का वजन जितना आवश्यक है, उसका 60 प्रतिशत सेभी कम होता है। ऐसे बच्चो का इलाज अस्पताल में होता है क्योंकि इसमे संक्रमण व विकलांग होने के आसार होते है।

चिकित्सा उपचार

    • बच्चे का व उसके माता-पिता को संतुलित व पौष्टिक आहार देने के लिए सलाह दे ।
    • उन्हे इस तरह का भोजन बताएं जो महंगा न हो, पर आसानी से उपलब्ध होने वाला हो।
    • पर्याप्त मात्रा मे प्राटीन का उपयोग करें।
    • बच्चे के अनुमानित शरीर के भार के अनुसार 3-5 ग्राम प्रतिकिलो मे प्रोटीन दें व कुछ कैलोरी 150-200 कैलोरी किलो/दिन से दें।
    • यदि क्रीम निकला हुआ दूध है तो उसमें थोड़ी चीनी व चिकनाई मिलाकर दें।
    • मल्टीविटामिन ड्रॉप्स दें।
    • यदि बच्चे को दूध पच रहा है तो आरम्भ में दूध व दूध के पदार्थ दें।
    • बच्चे को माँ का दूध पीने को प्रोत्साहित करें।
    • संक्रामक रोग का उपचार करें।
    • बाजार मे तैयार हार्लिक्स, बोर्नवीटा, माइलो आदि दूध में मिलाकर दें।
    • प्रोटीनेक्स, प्रोटीपेन जैसे पाउडर 2-3 चम्मच दूध में मिलाकर दें।
    • जो बालक आसानी से मुंह से नही ले पाते उन्हे शुरू में ट्यूब द्वारा दिया जाता है।
    • आजकल सरकार द्वारा आंगनबाड़ी व स्कूलो में अतिरिक्त पोषण वाला आहार दिया जाता है।उसे बच्चे को खिलाएं।
    • खाने में सोयाबीन, मूंगफली आदि दें।
    • भोजन में दाल, अंकुरित चने, मूंग, हरेपत्तों की सब्जियां, दही आदि अवश्य दें ।