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रक्तचाप कम होना, अल्प रक्तदाब, निम्न रक्तचाप (Hypotension)

रक्तचाप कम होना, अल्प रक्तदाब, निम्न रक्तचाप (Hypotension)

जब वयस्क व्यक्ति में सिस्टोलिक रक्तचाप 90 mm/mg से नीचें बना रहें तो उसकों अल्प रक्तदाब समझा जाता है। जबकि कुछ लोगों में रक्तचाप इतना ही रहता है। परन्तु इनकों कोई दिक्कत नही होती। यह स्तब्धता (shock) की पहली अवस्था हो सकती है।

कारण-:

  • पोषण- कमजोरी, एनीमिया, पानी की कमी, भोजन में प्रोटीन की कमी, भूख व उपवास
  • संक्रमण- लम्बे समय से रोग रहनें पर जैसे क्षय रोग व टायफायड।
  • खून निकलना- बवासीर, मूत्रद्वार द्वारा खून निकलना, पेप्टिक अल्सर में खून का जाना,
  • हदय- मायोकाडइटिस, हार्टअटैक (M.I.), वाल्व मे रुकावट कार्डियक टेम्पोनेड।
  • दवाइयाँ- उच्च रक्तचाप को कम करने वाली औषधियों के इस्तेमाल से।
  • अन्य- ज्यादा शराब पीना, एडीसन्स रोग, गर्भकाल, बहुत ज्यादा गर्म वातावरण, बहुत परिश्रम व चिन्ता, गुर्दे की बीमारी।

ऊर्ध्वस्थ अल्परक्तदाब (Orhostatic Hypotension)- जब लेटा हुआ व्यक्ति एकदम से खड़ा होता है। तो उसका कार्डियक आउटपुट कम हो जाता है। इसमें रोगी के खड़ें होनें पर चक्कर की शिकायत करता है।।

इसके बहुत से कारण हो सकतें हैं। जैसे-

  • दवाइयाँ
  • कुटिल शिरा
  • मधुमेह
  • तंत्रिका तंत्र की बीमारियाँ
  • लम्बे समय तक बिमार रहनें पर
  • बड़ें आपरेशन के बाद

 

इसमें रोगी लेटनें के बाद जैसे ही खड़ा होता है तो वह चक्कर आकर एकदम से गिर जाता है। यह मूर्च्छा कुछ समय तक ही रहती है। यह अवस्था प्रायः गर्मियों की धूप में खड़े होने पर ज्यादा देखी जाती है।

लक्षण व चिन्हृ :

  • चिड़चिड़ापन
  • थकावट व आलस्य
  • किसी काम में मन न लगना, व भूख कम लगती है।
  • तापमान का सामान्य से कम रहना।
  • ठंडे पसीने आना।
  • खड़ें होने पर आँखों के आगे अंधेरा आना।
  • नब्ज तेज चलना व रक्त का आयतन कम होना।
  • मूत्र कम आना।
  • श्रम करनें पर सांस फूलना

चिकित्सा (Treatment):

  • पूर्ण आराम।
  • ज्यादा प्रोटीयुक्त भोजन दें।
  • रोग के मूल कारण का पता लगाकर उसका उपचार करें।
  • रोगी को मानसिक विकारों से बचाएँ।
  • भोजन में नमक की मात्रा अधिक दें।

उपचार-:

  • रोगी को एक गिलास पानी मिलाकर पानी में दो चम्मच भर कर ग्लूकोज का पाउडर व 1/4 नमक मिलाकर कई बार दें। इससे रोगी को राहत मिलेगी।
  • चाय में नमक मिलाकर भी दिया जा सकता है।
  • रोगी को अधिक समय तक खड़ें न होने दें।