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उच्च रक्तदाब (Hypertension)

उच्च रक्तदाब (Hypertension)

यह दबाव जिससे रक्त, धमनियों में प्रवाह करता है। जिसकों ब्लड प्रेशर कहतें हैं यह प्रत्येक व्यक्ति में हर एक उम्र में अलग-अलग होता है।यह समय के साथ कम या ज्यादा होता रहता है।ब्लड- प्रेशर, चिन्ता, भय़, बैठनें या लेटने, वर्जिश या मानसिक अवस्था, दर्द या अन्य वजह से कम या ज्यादा हो सकता है

नोट- W.H.O यदि व्यस्क मनुष्य में ब्लड प्रेशर 160/95 mg/hg या उससे ऊपर हो तो उसे हाई बल्ड-प्रेशर मानना चाहिए। सामान्य ब्लड-प्रेशर बच्चों में 100/60 mm Hg व वयस्क में 120/90 mm Hg माना जाता है।

ब्लड-प्रेशर को प्रभावित करनें वाले कारक है-

  • कार्डियक आउटपुट
  • धमनियों की लचक
  • खून की मात्रा व गाढ़ापन

कारण-:

  • गाँवों की अपेक्षा शहरों में रहनें वालें व्यक्तियों में उच्च रक्त चाप ज्यादा पाया जाता है।
  • ज्यादा दिमागी व भाग-दौड़ करनें वाले व्यक्तियों में।
  • मधुमेह के रोगी व मोटे लोगो में।
  • ज्यादा नमक खाने पर यह शरीर में पानी को रोक कर B.P. बढा देता है।
  • पुरुषों में या स्त्रियों में इस रोग के होने की संभावना बराबर होती है।
  • आनुवंशिकता- यह एक महत्वपूर्ण कारण है अगर किसी व्यक्ति के दोनो माता-पिता को ब्लड-पेशर हो तो उसको हाइपरटेंशन होने की 50% संभावना होती है। यह तकलीफ एक परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है।

लक्षण (Symptoms):

  • सिरदर्द- यह इस रोग का मुख्य लक्षण है रोगी को सिर भारी व कनपटी पर चब-चब सी लगती है। प्रातःकाल में सिर दर्द ज्यादा होता है।
  • चक्कर आना,उल्टी आना,थकावट
  • अनिद्रा- रोगी पूरी तरह करवटे बदलता रहता है।
  • यदास्त की कमी
  • दिल का जोर-जोर से धड़कना
  • बैचेनी व चिड़चिड़ापन
  • कानों में सीटी-सी बजना
  • नाक से खून निकलना
  • पेशाब बार-बार जाना

चिन्हृ :

  • नब्ज, नाड़ी (Pulse)- इसकी तेज गति आसानी से महसूस की जा सकती है। बल्ड प्रेशर बहुत ज्यादा होने पर कनपटी की नसे व केरोटिड धमनी स्पष्ट देखी जा सकती है।
  • बल्ड-प्रेशर- रोगी को कुछ समय आराम करवा कर, उसका बल्ड प्रेशर बैठा कर या लिटा कर देखना चाहिए। हाथ व पैर का ब्लड-प्रेशर अलग-अलग से लेना चाहिए।
  • ह्रदय- हाइपरटेंशन रहने पर बायां निलय बढ़ जाता है। धड़कन भी बढ़ जाती है।हदय की समान्य आवाज में बदलाव आ जाता है।
  • आँखे- दृष्टि पटल की जांच इस रोग में आवश्यक होता है। बहुत दिनों तक हाइपरटेंशन से दृष्टिपटल में बदलाव आ जातें है। जो हमेशा के लिए होतें हैं।

जाँच (Investigation)

रक्त Blood)

  • बल्ड यूरिया
  • सीरम क्रिएटिन व सिरम पौटेशियम
  • सीरम प्रोटीन्स
  • सीरम लिपिड्म
  • ब्लड शूगर

छाती का एक्स-रे (X-ray chest)-

E.C.G.

पेशाब(Urine)-

(Intra- venous Pyelography (I.V.P.)-

चिकित्सा (Treatment):

  • रोगी को दिलासा दें कि घबरानें की जरुरत नही है अगर वह परहेज पर अपनी दिनचर्या पर ध्यान दें तो वह सामान्य जिन्दगी जी सकता है।
  • इसके लिए जरुरी है मानसिक शांति की। रोगी को मानसिक शांति के लिए योग, ध्यान की उपयोगित के बारें में समझायें।
  • जो रोगी मोटे हो उनको वजन कम करनें को कहें।
  • रोगी को खानें में नमक कम या बिल्कुल नही लेना चाहिए।
  • जो रोगी धूम्रपान या शराब का सेवन करतें हो, उसके लिए उनको मना करें।