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दिल का दौरा पड़ना

दिल का दौरा पड़ना (Acute Myocardial Infarction)

यह सबसे अधिक गम्भीर व भयानक मेडिकल इमरजेंसी हैं जिसकी शुरुआत अचानक होती है। इस रोग में पहलें कुछ घंटे व दिन काफी अहमियत वालें होतें हैं, जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है, मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ती जाती है। इसमें हद्य की एक धमनियों के अन्दर अवरोध पैदा हो जानें से हद्य की पेशियों में रक्त नही पहुँच पाता जिससें छाती के बीच में बहुत तेज दर्द होता है व मरीज को बैचेनी महसूस होने लगती है।
इसमें हद्य की एक या अधिक धमनियों के अन्दर अवरोध पैदा हो जानें से हद्य की पेशियों में रक्त नही पहुँच पाता जिससे छाती के बीच में बहुत तेज दर्द होता है व मरीज को बैचेनी महसूस होने लगती है। इस को मेजर हार्ट अटैक या अचानक होने वाला हार्ट फेल भी कहतें हैं। 25-40% पीड़ित रोगियों में दिल के दौरें सें मृत्यु हो जाती है।

कारण

  • परिहद् धमनीकला काठिन्य
  • मानसिक या शारीरिक तनाव
  • रक्तचाप का कम हो जाना जैसे की जठरान्त्रशोथ के बाद, तीव्र रक्त स्राव के बाद, एनेस्थसिया या शल्य चिकित्सा के बाद
  • महाधमनी की कपाट विकृति।
  • धूम्रपान मद्यपान व अन्य नसीलें पदार्थों के सेवन से कोरोनरी धमनी विकार।

लक्षण (Symtomps)

  • यह अधिकतर अचानक होता है पर कई बार इसके लक्षण पहलें से ही नजर आने लगतें हैं जिससे अचानक उठने वाला एन्जाइम का दर्द या उसके समय का बढ़ना या जल्दी-जल्दी आना शामिल है।
  • चक्कर आना, जल्दी थकान महसूस करना
  • रक्तचाप अधिक रहना
  • मरीज को अचानक तीव्र छाती में दर्द उठता है दर्द छाती के अग्र भाग में बीचोबींच सिकुड़नें जैसा लगता है। जो गर्दन और बाँये व कभी-कभी कंधों व भुजाओं की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है।
  • यदि अधिक समय तक व तीव्र प्रकार का होता है। तो हद्यपेशी के गल जानें की संभावना उतनी ही अधिक रहती है। रोगी को छाती पर भार व जकड़न महसूस होती है।
  • बेचैनी, नाड़ी का तेज चलना।
  • अधिक पसीना आना।
  • कभी-कभी शरीर नीला पड़ने लगता है।
  • कभी-कभी तेज दर्द के कारण मुहँ पीला पड़ जाता है।
  • उल्टियाँ आने लगती है।

परिणाम

  • इस रोग से 25% रोगियों की एकाएक मृत्यु हो जाती है।
  • यदि छाती का दर्द तीव्र व लम्बे समय तक न बना रहें, बल्ड प्रेशर बढ़ा हुआ हो व साथ में मधुमेह रोग भी हो, तो यह मरीज के लिए अच्छा नही है।
  • रोग के आक्रमण के पहले तीन दिन भयानक होतें हैं जिससे पहलें के 24 घंटे रोगी के लिए सबसे खतरनाक होतें हैं।

निदान व जाँचें

  • ई.सी.जी. में बदलाव
  • सीरम एन्जाइम SGOT व SGPT का बढ़ना।

चिकित्सा (Treatment)

मरीज को जल्दी से जल्दी अस्पताल भेज देना चाहिए।